।।स्वाध्याय परमं तपः।।

सुविधिसागर जी महाराज ने पद्मपुराण में मूल संघ आम्नाय के सिद्धांतों के विपरीत जो बातें लिखी हैं उस पर एक प्रकरण में यह सिद्ध करने का प्रयास किया कि पद्मपुराण के पर्व १७ श्लोक २६८ में जो गन्धर्व देव द्वारा मद्यपान करने का वर्णन आया है उसमें वर्णित गन्धर्व देव नहीं था अपितु एक विद्याधर […]

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ब्राह्मी_लिपि में कितने प्रकार का लेख विधान (लेखन-प्रकार) बताया गया है ?

ब्राह्मी_लिपि में कितने प्रकार का लेख विधान (लेखन-प्रकार) बताया गया है ? उत्तर- 18 प्रकार का । ब्राह्मी, 2. यवनानी, 3. दोषापुरिका, 4. खरोष्ट्री, 5. पुष्करशारिका 6. भोगवतिका, 7. प्रहरादिका, 8. अन्ताक्षरिका, 9. अक्षर पुष्टिका, 10. वैनयिका, 11. निह्नविका, 12. अंकलिपि, 13. गणितलिपि, 14. गंधर्वलिपि, 15. आदर्श लिपि, 16. माहेश्वरी, 17. तामिली-द्राविड़ी, 18. पौलिन्दी । […]

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।।स्वाध्याय परमं तपः।।

📖zoom app के माध्यम से रत्नकरंडक श्रावकाचार ग्रंथ के स्वाध्याय में अवश्य सम्मिलित हो https://fb.watch/6raU54GYcQ/ जय जिनेन्द्र📖आचार्य समंतभद्र जी द्वारा विरचित रत्नकरंडक श्रावकाचार ग्रंथ का स्वाध्याय स्वर्गीय पंडित रतनलाल जी बैनाड़ा के परम विद्वान शिष्य डॉक्टर श्री किरण प्रकाश जैन भैया जी (श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर) द्वारा २६ जून २०२१ से प्रतिदिन शाम ७:३० बजे […]

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।।स्वाध्याय परमं तपः।।

📖मूलाचार की मूल गाथाओं में साधु के एकल विहार निषेध के प्रमाण ✨स्वच्छंदगदागदसयणणिसियणादाणभिक्खवोसरणे। स्वच्छंदजंपरोचि य मा मे सत्तुरिव एगागी ।150।सोना, बैठना, ग्रहण करना, भिक्ष, मल त्याग करना, इत्यादि कार्यों के समय जिसका स्वच्छंद गमनागमन है, स्वेच्छा से ही बिना अवसर बोलने में अनुरक्त है, ऐसा एकाकी मेरा वैरी भी न हो।150। ✨गुरुपरिवादो सुदवोछेदो तित्थस्स मइलणा […]

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