मत करो लोभ, होगा क्षोभ निर्मोही बनो-मुनि आदित्य सागर
इंदौर। लोभ और मोह यह दो विषैले सर्प के समान हैं। ना चाह कर भी जीव इनसे बच नहीं पा रहा है। मोह, लोभ की प्रवृत्ति से क्षोभ होता है और इससे ग्रसित व्यक्ति जीवन के अर्थ को भूलकर पूरा जीवन अर्थ (धन-संपत्ति) के संग्रह में लगा रहा है। यह जानते हुए भी कि आयु […]
Continue Reading