सम्यग्दर्शन के साथ शुचिता ही उत्तम शौच है – आचार्य अतिवीर मुनि

प्रशममूर्ति आचार्य श्री 108 शान्तिसागर जी महाराज (छाणी) परंपरा के प्रमुख संत परम पूज्य आचार्य श्री 108 अतिवीर जी मुनिराज ने श्री शान्तिनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर, रानी बाग,  दिल्ली में आयोजित पर्वाधिराज दसलक्षण महापर्व के पुनीत प्रसंग पर धर्म के चतुर्थ लक्षण “उत्तम शौच धर्म” की व्याख्या करते हुए कहा कि शुचिता अर्थात् पवित्रता का […]

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