मधुबन के पर्वतों पर ऐसा झलक रहा है,वात्सल्य व स्नेह का सागर उमड़ रहा है -साधर्मी साधकों के आपसी विनय,सम्मान व वैयवृत्ति की अनूठी मिसाल
मधुबन के पर्वतों पर ऐसा झलक रहा है,वात्सल्य व स्नेह का सागर उमड़ रहा है -साधर्मी साधकों के आपसी विनय,सम्मान व वैयवृत्ति की अनूठी मिसाल* सम्मेदशिखरजी शाश्वत तीर्थराज श्री सम्मेदशिखर जी जो जैन दर्शन का सबसे पवित्र व सर्वोच्च पूज्य क्षेत्र है। जहां प्रति वर्ष लाखो जैन धर्मावलंबी व सैकडो जैन संत वंदनार्थ पधारते है। […]
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