षट खंड अधिपति चक्रवती भी सांसारिक वैभव छोड़कर धर्म की शरण लेते है वात्सलय वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी
षट खंड अधिपति चक्रवती भी सांसारिक वैभव छोड़कर धर्म की शरण लेते है वात्सलय वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी श्री शान्तिवीरशिवधर्माजीत वर्द्धमान सुर्रिभ्यो नमः महावीर जी राजस्थान धर्मानुरागी महानुभावो, संसार में प्राणी सेकड़ो कष्टों। से ग्रसित हैं, उनके जीवन में नाना प्रकार के क्लेश पाए जाते है। रोगों ने उनके शरीर को अपना घर […]
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