श्रावक बनना कठिन, श्रमण बनना उससे भी कठिन-मुनि श्री आदित्य सागर जी

श्रावकाचार श्रमणाचार विषयक संगोष्ठी का दूसरे दिन इंदौर। मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज ने कहा कि आपके और हमारे पुण्य का उदय है कि इस पंचम काल में भी हमें जिनवाणी का श्रवण एवं मंथन करने का अवसर मिल रहा है। श्रावक और श्रमण की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि श्रावक बनना कठिन है […]

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