शरीर को किराएदार बना के रखो मकान मालिक बनाके नहीं – मुनिश्री आदित्य सागर जी
धन, शरीर, मकान, स्त्री, पुत्र, मित्र सर्वथा अन्य स्वभावी हैं। आत्मा से इनका कोई संबंध नहीं है लेकिन मोह के वशीभूत अज्ञानी जीव इन्हें स्व द्रव्य मानकर अपना मानता है जबकि यह हैं नहीं। अंत समय जो आपके साथ सिद्ध अवस्था तक जाएगा इस उद्गार समोसरण मंदिर कंचनबाग मैं श्रुत आराधना वर्षा योग के अंतर्गत […]
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