विलासिता व परिग्रह से युक्त संसार से विरक्त होना दुर्लभ क्रिया है*- आचार्य विनीत सागर नवदीक्षार्थी की गोद भराई जैन समाज कॉमा द्वारा आज

विलासिता व परिग्रह से युक्त संसार से विरक्त होना दुर्लभ क्रिया है*- आचार्य विनीत सागर नवदीक्षार्थी की गोद भराई जैन समाज कॉमा द्वारा आजकामाविलासिता भरे संसार से वर्तमान समय में विरक्त हो जाना किसी अजूबे से कम नहीं है जहां आज मनुष्य आवश्यकता से अधिक विलासिता एवं परिग्रह से युक्त नजर आता है वही जीवन […]

Continue Reading