जिस धर्म से परमात्मा का रहस्य प्रकट होता है, वह आकिंचन्य धर्म है- मुनि श्री विशल्य सागर महाराज
झुमरीतिलैया (कोडरमा)। दशलक्षण पर्व के नवें दिन जैन धर्मावलंबियों ने ” उत्तम आकिंचन्य धर्म” के रूप में मनाया। महासंत जैन मुनि श्री 108 विशल्य सागर गुरुदेव ने अपनी पीयूष वाणी में भक्तजनों को कहा कि दुनिया का कोई भी पदार्थ मेरा नहीं है, ऐसा मानना और जानना ही आकिंचन्य धर्म है। जहां बाहर-भीतर एक हो, वहीं […]
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