मृदुता अर्थात कोमलता का नाम मार्दव है, मान (अहंकार) के अभाव में ही मार्दव धर्म प्रकट होता है – आचार्य अतिवीर मुनिराज

रेवाड़ी। जो मनस्वी पुरुष कुल, रूप, जाति, बुद्धि, तप, शास्त्र और शीलादि के विषयों में घमंड नहीं करता, उसका मार्दव धर्म होता है। जब तक मार्दव धर्म के विपरीत मान विद्यमान है तब तक वह मार्दव धर्म को प्रकट नहीं होने देता। मृदुता अर्थात् कोमलता का नाम मार्दव है और मान (अहंकार) के अभाव में ही […]

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