मानव का जीवन गीली मिटटी की भाति की तरह होता है संभवसागर महाराज

मानव का जीवन गीली मिटटी की भाति की तरह होता है संभवसागर महाराज खुरई पूज्य निर्यापक श्रमण संभवसागर महाराज ने अपने उद्बोधन मे लक्ष्य निर्माण के विषय मे अपना उद्बोधन दिया महाराज श्री ने एक लोकोक्ति बोलते हुए समझाया की  मानव जीवन गीली मिट्टी, किस मौसम गल जाएगी। जैसा सांचा होगा, वैसी मूरत यह ढल […]

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