मनोरजंन के साथ नहीं बल्कि एकाग्रता के साथ करो प्रभू का दर्शन आत्मसाधना में एकाग्रता और सामाजिक जीवन में एकजुटता होः विज्ञमति माताजी
मनोरजंन के साथ नहीं बल्कि एकाग्रता के साथ करो प्रभू का दर्शन आत्मसाधना में एकाग्रता और सामाजिक जीवन में एकजुटता होः विज्ञमति माताजी ग्वालियर जब उल्लास का अवसर हो तो खूब मनोरंजन करो, लेकिन प्रभु के दर्शन और पूजन के अवसर पर एकाग्रता का होना आवश्यक है। क्योकि मनोरंजन के साथ प्रभु दर्शन से जीवन […]
Continue Reading