मन, वचन और काय की सरलता ही आर्जव धर्म है-मुनि आदित्य सागर जी

इंदौर। जिस व्यक्ति के बोलने, सोचने और कार्य करने में वक्रता नहीं होती अर्थात कुटिलता (मायाचारी) नहीं होती। उसे ही आर्जव धर्म कीप्राप्ति होती है। मन, वचन और काय की सरलता का नाम आर्जव धर्म है। मायाचार रहित जीवन जीना है तो दर्पण, बालक और बांसुरी के समान जीवन जियो। व्यक्ति की छवि जैसी होती है, […]

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