भाव के बिना पूजा व्यर्थ है- आचार्य सुंदर सागर जी महाराज

प्रतापगढ़ । केवल मंदिर में आना धर्म नहीं है। मंदिर में आकर पूजा करना क्रिया मात्र है। जब तक उसमें भाव नहीं है, यह पूजा व्यर्थ है। आपका मंदिर में आकर इस थाली से आकर उस थाली में द्रव्य चढ़ाने का कोई अर्थ नहीं है। जो भगवान निरंजन हैं, उन्हें आपके जल चढ़ाने की आवश्यकता नहीं […]

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