भाग नौ : मैं रावण…मेरा पछतावा मेरी अच्छाई का प्रमाण! – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

रावण @ दस : भाग नौ मैंने सीता का हरण तो किया, पर उसके साथ भोग नहीं किया, क्योंकि वह मुझे नहीं चाहती थी। वह मेरे अपने महल में थी तो भी मैंने जबरन उस पर अधिकार जमाना नहीं चाहा। मेरी पत्नी पटरानी मंदोदरी ने भी सीता को समझाया था कि तुम रावण को स्वीकार […]

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