भाग तीन : मैं सात्विक था… तामसिक नहीं! – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज
रावण @ दस : भाग तीन नीति से दिग्विजय हुआ, कभी परस्त्री गमन नहीं स्वीकारा मैं सदा सात्विक विचारों वाला, धर्म और नीति का पालन करने वाला…पर विपरीत कर्मों की गति से मति बिगड़ी और एक ऐसी गलती कर बैठा जिसके कारण आज नरक भोग रहा हूं। आपको आश्चर्य होगा कि मैंने कभी मुझ पर […]
Continue Reading