भाग छः : मैं रावण… एक सच्चा प्रभु भक्त! – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

रावण @ दस : भाग छः मैं रावण…जिसे तुम जलाने के लिए उत्सव मनाते हो, क्या उसके भक्त स्वरूप को जानते हो? शायद जानते होते तो मेरा पुतला जलाने के बजाय अपने मन में भक्ति का दीप जलाते। मेरी जिनेन्द्र भक्ति सदा सच्ची थी, तभी तो मैं तीर्थंकर प्रकृति के बन्ध को प्राप्त कर सका। […]

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