भाग चार : मैं मातृ-पितृ भक्त था और दृढ़ निश्चयी भी! – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

रावण @ दस : भाग चार विद्याएं और सिद्धियाँ प्राप्त करने को की तपस्या मेरे व्यक्तित्व का एक और अच्छा पहलू था। मैं माता-पिता का सच्चा भक्त था। उनकी आज्ञा का पालन सदा करता था और जो जीवन में ठान लेता, उसे करके ही दम लेता था यानि दृढ़ संकल्पित था। मां बताया करती थीं […]

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