प्राण प्रतिष्ठा महामहोत्सव : संचित पुण्यों से मिलता तीर्थंकररूपी कर्म का फलः आचार्यश्री

सारांश आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज ने कहा कि वर्तमान में मनुष्य अर्थ पुरुषार्थ को प्राप्त करने में लगे हुए हैं लेकिन अर्थ पुरुषार्थ के बजाय धर्म पुरुषार्थ से ही मोक्ष संभव है। पढ़िए विस्तृत रिपोर्ट… मदनगंज-किशनगढ़ में वात्सल्य वारिधि व राष्ट्र गौरव आचार्यश्री वर्धमान सागर महाराज ने कहा कि संसार का सुख नश्वर है। […]

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