पर पदार्थो परिग्रहों के प्रति ममत्व भाव हटाना आकिंचन्य धर्म – आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी

श्री महावीरजी। श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र श्री महावीर जी में विराजमान वात्सल्य वारिधि पंचम पट्टाधीश 108 आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने दशलक्षण पर्व के नौवें दिन गुरुवार को आकिंचन्य धर्म की विवेचना की। आप अकेला अवतरे मरे अकेला होय, यो कबहु इस जीव का साथी सगा न कोय। बारह भावना की यह पंक्तियां […]

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