धर्म प्राचीन अर्वाचीन नहीं धर्म तो समीचीन होता है

धर्म प्राचीन अर्वाचीन नहीं धर्म तो समीचीन होता है आचार्य समंतभद्र स्वामी ने श्री रत्नकरंडक श्रावकाचार जी में धर्म निरूपण के समय यह उक्ति कही कि-धर्म प्राचीन अर्वाचीन नहीं समीचीन होता है क्रिया और भाव की समीचीनता ही धर्म को उद्घाटित करती है। आज दसलक्षण पर्व के प्रथम दिन उत्तम क्षमा का दिवस है आज […]

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