त्याग ही प्राप्ति का मार्गः भावलिंगी संत आचार्य श्री 108 विमर्शसागर जी महाराज

मूर्छा में जीने वाले कभी मोक्ष को उपलब्ध नहीं होतेमूर्छा का अर्थ है भीतर के प्रेम का अनुभव नहीं होना भावलिंगी संत आचार्य श्री 108 विमर्शसागर जी महाराज ने भक्तजनों को दिए अपने सम्बोधन में कहा है कि किसी ने पूछा, प्राप्ति का मार्ग क्या है। मैंने कहा कि त्याग ही प्राप्ति का मार्ग है। […]

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