तजो मान तभी बन पाओगे भगवान- मुनि आदित्य सागर जी

इंदौर। मान महा विष रूप करहि नीच गति जगत में अर्थात मान के मद में मदहोश व्यक्ति किसी को कुछ नहीं समझता। उसे ज्ञान का भी भान नहीं होता और वह इस कर्तत्व भाव में जीता है कि सबका में ही कर्ता हूं। घर संसार सब मैं ही चला रहा हूं, यह उसका भ्रम है। […]

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