ज्ञान वही है जिससे चारित्र की शुद्धि होती है और चित की विशुद्धि होती है विशल्य सागर जी महाराज,

ज्ञान वही है जिससे चारित्र की शुद्धि होती है और चित की विशुद्धि होती है विशल्य सागर जी महाराज, झुमरी तिलैया आज श्री दिगम्बर जैन समाज के सानिध्य में हो रहे विश्व शांति महायज्ञ 24 समोसरण कल्पद्रुम विधान महायज् में परम पूज्य गणाचार्य 108 विराग सागर जी महामुनिराज के परम प्रभावक शिष्य जैन संत गुरुदेव […]

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