जिस शाश्वत तीर्थराज श्री सम्मेदशिखर जी से तीर्थंकरों और अनंत मुनियों ने निर्वाण की प्राप्ति की, ऐसे पर्वतराज का कण-कण पूजनीय है।

जिस शाश्वत तीर्थराज श्री सम्मेदशिखर जी से तीर्थंकरों और अनंत मुनियों ने निर्वाण की प्राप्ति की, ऐसे पर्वतराज का कण-कण पूजनीय है। श्री रविन्द्र जैन जी का भजन है — कंकर कंकर बन गया मोती, पत्थर पत्थर धन्य हुआ ।अरिहंतो के चरण चूम जड़ पर्वत भी धन्य हुआ ।। लेकिन क्या आप जानते हैं ? […]

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