छल-कपट का अभाव ही आर्जव धर्म है – आचार्य अतिवीर मुनि

रेवाड़ी। परम पूज्य आचार्य श्री 108 अतिवीर जी मुनिराज ने दशलक्षण महापर्व के अवसर पर अतिशय क्षेत्र नसिया जी में आयोजित श्री तीस चौबीसी महामण्डल विधान में धर्म के तृतीय लक्षण उत्तम आर्जव की व्याख्या करते हुए कहा कि ऋजुता अर्थात् सरलता का नाम आर्जव है। मायाचारी कभी सफलता नहीं पा सकता, आत्म-कल्याण के लिए सरल […]

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