चारित्र के बिना व्यक्तित्व वैसा ही है, जैसे खुशबू के बिना फूल। संभवसागर महाराज

चारित्र के बिना व्यक्तित्व वैसा ही है, जैसे खुशबू के बिना फूल। संभवसागर महाराज खुरई शनिवार की प्रातःबेला मे प्राचीन जिनमन्दिर मे विराजित निर्यापक श्रमण मुनि श्री संभवसागर जी महाराज ने दीक्षा दिवस की पूर्व मंगल बेला मे अपने उद्बोधन मे चारित्र की महत्ता को बताया। अमृतमयी वचनों मे मुनि श्री ने कहा चारित्र के  […]

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