गणिनी आर्यिका 105 स्वस्तिभूषण माताजी के अवतरण महोत्सव पर नमन

गणिनी आर्यिका 105 स्वस्तिभूषण माताजी के अवतरण महोत्सव पर नमन इस यह त्याग तप की मुर्तिसमता रस की प्रतिमूर्तिस्वस्तिधाम जैसी बनाई अनुपम कृतिसबका मङ्गल करने वालीजय हो माँ स्वस्ति मोती पुष्पाजी की तुम थी अनुपम मोतीजु यु बाला बड़ी हुई वैराग्य का बीज बड़ा चलीआज वह पावन दिन है जो सचमुच एक अहम दिन है […]

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