कथाओं को जीवन में नहीं उतारा तो कथा सुनने का औचित्य नहींः मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज
इंदौर। मौज- मस्ती के लिए कोई पर्व नहीं होता। आत्मानंद की लब्धि के लिए पर्व होता है। बाहर का पर्यटन करना कोई पर्व का आनंद नहीं है, अंदर का पर्यटन करना ये पर्व का आनंद है। आज वात्सल्य एवं रक्षा भाव को प्रदर्शित करने वाला पर्व रक्षाबंधन है। आज के दिन विष्णुकुमार मुनि ने अकम्पनाचार्य आदि […]
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