अहिंसा मय धर्म ही माध्यम है सिद्धि प्राप्त करने का हमारे तीर्थंकर कर्मो से रहित है इसलिए वह स्वाधीन है हमारी आत्मा कर्मो सहित है, इस कारण पर पराधीन है।

अहिंसा मय धर्म ही माध्यम है सिद्धि प्राप्त करने का हमारे तीर्थंकर कर्मो से रहित है इसलिए वह स्वाधीन है हमारी आत्मा कर्मो सहित है, इस कारण पर पराधीन है। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी श्री महावीर जी हमारी आत्मा कर्मों के अधीन है ,इस कारण हम पराधीन है हमारे तीर्थंकर कर्मों से रहित है […]

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