तप चिंतामणि रत्न है, इससे ही होगी मोक्ष प्राप्ति – आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज

श्री महावीर जी। दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र श्री महावीर जी में विराजमान वात्सल्य वारिधि पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर जी ने दशलक्षण पर्व के सातवें दिन उत्तम तप धर्म की विवेचना की। आचार्य श्री ने बताया कि सभी संसारी जीवों की आत्मा कर्मों से बंधी है। यदि आप आत्मा को परमात्मा बनाना चाहते हैं […]

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