अल्फाज में आगम को मुखरते देखा
उनके अल्फाज में आगम को मुखरते देखाउनके होठों से समयसारको झरते देंखावो कुंद कुंद की वाणी के*गुरुवर गणधरये विधा सागर वही जोकभी थे विधाधरजब से रखा है ये सरउनके पाक कदमो परसंवर गई मेरी तकदीरउनकी रहमत परसन्त शिरोमणि गुरुदेव की जय जय हो
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