🥁संस्मरण🥁
शेयर 🤗 #विद्याधरसेविद्यासागर (किताब)😍 माता के लिए साड़ी – शांता को वह क्षण याद आ जाता है अचानक, जब युवक विद्याधर सांगली के बाजार जा रहे थे और माँ कह पड़ी थीं-‘वहाँ तक जा रहा है तो मेरे लिए एक सस्ती सी साड़ी लेते आना। ‘सस्ती’ शब्द पर बिदके थे विद्याधर फिर बोले सस्ती वस्ती […]
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