● प्राकृत जैनागम मूलग्रन्थ स्वाध्याय●
● प्राकृत जैनागम मूलग्रन्थ स्वाध्याय● Day 01 : : तत्त्वसार गाथा 01 (मंगलाचरण)ग्रंथकार- आचार्य देवसेन स्वामीप्रस्तुति- डॉ. पुलक गोयल, जबलपुर झाणग्गि-दड्ढ-कम्मेणिम्मल-सुविसुद्ध-लद्ध-सब्भावे।णमिऊण परम-सिद्धेसुतच्चसारं पवोच्छामि।।1।। Video के द्वारा अर्थ समझने के लिए click करें⬇️ ग्रन्थ आरम्भ | मंगलाचरण | गाथा 01 | ग्रन्थ परिचय | ग्रन्थकार परिचय | विनय और बहुमान आदि के समावेश के साथ व्याकरणिक […]
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