7 ओक्टोम्बर 2019 को आचार्य श्री सुनिलसागर जी गुरूराज का 43वा अवतरण दिवस था,आचार्य संघ सागवाडा की धरा पर विद्यमान था। उस पावन दिवस पर देश भर से अनेक श्रद्धालु विभिन्न राज्यो से प्रातः से ही सागवाडा में उपस्थित हो चुके थे।प्रातः 7 बजे आचार्य श्री विशाल संघ सहित ऐतिहासिक जूना मन्दिर जी मे स्वाध्याय कर रहे थे। जिसमें दूर दूर से आने वाले श्रद्धालु सहजता से आचार्य भगवन्त के चरणों को नमन कर आशीष प्राप्त कर रहे थे।इसी क्रम में हथाई मूल के बांसवाड़ा निवासी सनत भाई सपत्नीक अपने दोनों पुत्र प्रासुक व द्रव्य के साथ उपस्थित हुए।इनके दोनो पुत्र होनहार व धार्मिक संस्कारो से परिपूर्ण है।यह पूरा परिवार समय समय पर गुरुओ के लिए चौका लगाना-भक्ति व वैयावृत्ति में सदैव अग्रणी रहता है एवं इनके दोनो पुत्र प्रासुक व द्रव्य जब भी प्रवचन सभा मे सम्मिलित होते है तो अत्यंत सुंदर मंगलाचरण प्रस्तुत करते है।
आचार्य श्री संघ सहित जूना मन्दिर जी मे स्वाध्याय कर रहे थे तब ये दोनों भाई प्रासुक व द्रव्य अपने पिता से एक पेन का सुंदर सेट लेकर आचार्य श्री के पास जाकर नमन करते हुए भेट करने लगे।
आचार्य भगवन्त ने दोनो भाइयो को आशीष देते हुए उस पेन सेट पर एमआरपी देखी और कहा आपके माता पिता कहा है,जिस पर उनके पिता जी ने हाथ ऊँचा करके अपनी ओर ध्यान आकर्षित किया।तब पुज्य आचार्य श्री ने वात्सल्य पूर्वक कहा इस सेट पर 450 ru की एमआरपी लिखी है और मेरे पेंसिल का ही प्रयोग होता है,और वो भी अभी उपलब्ध है इसलिए परिग्रह नही रखता व जब सामान्य से कार्य चलता है तो ऐसी महंगी वस्तुओ का प्रयोग क्यो??
आपको कुछ अच्छा करना ही है तो इस सेट को दुकानदार को वापस देकर इसके बदले में इतने मूल्य के साधारण पेन ले आओ जो लगभग 90 पेन आएंगे और उसे असहाय स्कूलों के बच्चों में वितरित कर दो। जिससे उनके चेहरे पर आने वाली मुस्कान आपको सुकून व दुआ देगी।
आचार्य भगवन्त की वात्सलयमयी शिक्षा को सुनकर वे दोनों भाई व उनके अभिभावक ने आचार्य श्री को नमन करते हुए उस सेट को वापस करके उतने ही मूल्य के पेन असहाय बच्चो में वितरित करने का संकल्प लिया।
आचार्य भगवन्त श्री सुनिलसागर जी गुरुराज के द्वारा हुए इस प्रेरणास्पद प्रसंग को देखकर उपस्थित समस्त श्रावक गदगद हो गए।
✍गुरु गुणमाला गूँथक-शाह मधोक जैन चितरी✍
नमनकर्ता-श्री सुनिलसागर युवासंघ भारत
