जीवन में सद्गुणों को अपनाकर जीवन को अच्छा बनाए आचार्य सुनील सागरजी केंद्रीय काराग्रह में हुए आचार्य श्री के प्रवचन

JAIN SANT NEWS जयपुर

जीवन में सद्गुणों को अपनाकर जीवन को अच्छा बनाए आचार्य सुनील सागरजी केंद्रीय काराग्रह में हुए आचार्य श्री के प्रवचन

जयपुर

परम पूज्य चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य भगवान श्री सुनील सागर गुरुदेव ने केंद्रीय कारागृह जयपुर जेल में कहा कि मत ढूं जीसीढो दुनिया में सबसे अच्छा कौन है, अपने भीतर झांके और देखें तुमसे अच्छा कौन है। हमारी अच्छाइयां बुराइयों में बदल जाती हैं, हम वासना में आकर खोटे काम कर लेते है। सोचिए बंधुओं हमारा भाग्य खराब है कि हमने रास्ता गलत चुना है,वैसे तो हर एक इंसान अच्छा होता है, वह अपनी कमजोरियों से हार जाता है। हिंसा, झूठ, चोरी, कुशील जैसे पापों में फंस कर हम अपने भाग्य को गलत दिशा में ले जाते हैं। हम राज करके थोड़े से लोगों को बदल सकते हैं लेकिन साधु संत तपस्या करके सारी दुनिया को बदल देते हैं। आप अधिकारियों को अपना दुश्मन मत समझो, यह आपके लिए हितकारी है, यह आपकी सुरक्षा के लिए रखे जाते हैं, वह अपनी होली, दिवाली, दशहरा सब कुछ छोड़कर आपकी सेवा में लगे रहते हैं। यह जेल बंदीगृह नहीं है सुधार ग्रह हैं। आप सत्य सदाचार से ऐसा व्यवहार करो कि आपकी 20 साल की सजा भी 1 साल में पूरी हो जाए ।श्री कृष्ण का जन्म भी जेल में हुआ लेकिन वह कर्म से सारे विश्व में प्रसिद्ध हो गए । पाप करना यह प्राणी अच्छा समझता है लेकिन विचार करो क्षण भर का मजा जिंदगी भर की सजा में बदल जाता है।

संत साधुओं के दर्शन करने मात्र से 100 यज्ञ करने के बराबर पुण्य का फल मिलता है। गांधी जी नेहरू जी भी जेल में गए लेकिन उन्होंने जेल में रहकर सदाचार सत्य का जीवन जिया एवं अपने आचार विचार से दूसरे को भी प्रभावित करते थे। श्री कृष्ण ने कहा कि कर्म ऐसा करो कि आपका जीवन ऊंचाईयों को प्राप्त करे, कभी आपको पछताना नही पड़े। सबरी को मुक्त करने के लिए श्री राम पहुंचे, जयपुर के अंदर केंद्रीय कारागृह जेल के कैदियों को पाप से मुक्त करने के लिए आज आचार्य सुनील सागर जी गुरुदेव ससंघ पहुंचे। हम अपने जीवन में कभी भी मद्य, मांस, शराब का सेवन नहीं करेंगे हमेशा सत्कर्म करें।राम ,बुद्ध ,महावीर जैसा जीवन जिए, वह भी इंसान थे हम भी इंसान हैं, उन जैसा पवित्र आचरण करके हम भी अपने जीवन को अच्छा बनाए

आचार्य श्री की वाणी से प्रभावित होकर कैदियों ने शराब,मांस, अंडा का त्याग करने का संकल्प दिया। जय जयकार की ध्वनि से जेल का सारा वातावरण प्रशस्त हो गया। जेल अधीक्षक श्री संजय यादव जी, जेल अधिकारी श्री बिहारी लाल जी, श्री रोहित जैन,श्रीमती शशि जैन ,श्री सुभाष जैन ,श्रीमती ज्ञानमती जैन ,श्री नवीन जैन ,श्रीमती स्नेहा जैन,श्रीमती संगीता लुहाड़िया,श्री मोहित जैन ने आचार्य श्री के आशीष को प्राप्त किया । श्री संजय यादव जी ने कहा कि जैन धर्म में साधु हमेशा ज्ञान प्राप्त करने में अग्रसर रहते है, जैन धर्म में अहिंसा हमेशा देखने को मिलती है ।जैन संत संसार के वैभव को छोड़कर,साधना ,तपस्या में लीन रहते हैं। जैन धर्म में स्यादवाद एक ऐसा सिद्धांत है जो सभी बातों को स्वीकार करता है, जिससे कही भी वैचारिक मतभेद नहीं होते है।

अंत में आचार्य श्री ने सभी उपस्थित को आशीष वचन देते हुए अच्छा जीवन जीने की प्रेरणा दी।

गुरु भक्त :- मितांशु शाह( तलोद गुजरात) से प्राप्त जानकारी

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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