आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के पुण्य का अतिशय एक संस्मरण
पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के कर कमलों से वर्ष 1990 में प्रथम मुनि दीक्षा श्री मूलचंद जैन पारसोला ने प्राप्त की। और वह मुनि श्री 108 ओमसागर जी महाराज बने उसी दिन प्रथम आर्यिका दीक्षा ब्रह्मचारिणी सुशीलाबाई ने ग्रहण की उनका नामकरण आर्यिका 105 श्री वैराग्यमति माताजी हुआ।
वही आचार्य संघ सानिध्य में कार्तिक अष्टान्हिकापर्व में कल्पद्रुम महामंडल विधान आचार्यसंघ सानिध्य में संपन्न हुआ। तभी विधान पूर्ण होने पर एक विशेष घटना घटी कुछ दिन पूर्व मंदिर जी से चोरी चले गए उपकरण आदि चोर स्वयं रात्रि में श्रावक के घर पर आवाज लगाकर छोड़ गए जिससे समाज में हर्ष की लहर व्याप्त हो गयी। यही सच है, यही आचार्य श्री के पुण्य का अतिशय है।
वात्सल्य भक्त परिवार से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी
