वह निरोगी है जो हितकर भोजन ऋतु के अनुसार करता है कनकन्दी गुरुदेव

JAIN SANT NEWS भीलूड़ा

वह निरोगी है जो हितकर भोजन ऋतु के अनुसार करता है कनकन्दी गुरुदेव

भीलूड़ा

परम समता धारी आचार्य कनक लनंदी गुरुदेव ने अंतरराष्ट्रीय वेबीनार ने बताया कि वह निरोगी है जो हितकर भोजन ऋतु के अनुसार करता है। भोजन के बाद केवल 100 कदम चलना चाहिए उससे अधिक नहीं चलना चाहिए। जिनवाणी रूपी अमृत आचार्य श्री पहले देते थे तो उसे नहीं समझने के कारण गटर में चला जाता था। अतः अभी आचार्य श्री हमारी योग्यता के अनुसार कम दे रहे है।

आचार्य श्री 3,4 पुस्तकें किस प्रकार आहार करना चाहिए कैसा करना चाहिए कैसे भाव रखना चाहिए उस पर लिखे है शारीरिक आध्यात्मिक मानसिक स्वास्थ्य, स्वास्थ्य गीतांजलि, आदर्श आहार-विहार विचार आदि पुस्तके लिखे हैं। आचार्य श्री कहते हैं शरीर से ही नहीं मन से भी स्वस्थ्य रहो। भोजन उतना ही करें जिससे धर्म की आराधना सुचारु रुप से चलें। आयुर्वेद शास्त्र केवल जेनों के नहीं हैं समस्त लोगों के लिए हैं,चाहे वह जैन साधु ने लिखे हो। आचार्य श्री कहते हैं पढ़े लिखे अधिक गलत भोजन करते हैं। गांव के लोग सही भोजन करते हैं। भोजन करने के लिए सुख पूर्वक जमीन पर आसन लगाकर बैठना चाहिए। क्रमबद्ध, ऋतु के अनुकूल, शीघ्र भी नहीं, अति धीरे भी नहीं 32 बार चबाकर भोजन पानी की तरह हो हो जाए ऐसा करना चाहिए। स्निग्ध तथा मधुर आहार प्रारंभ में लेना चाहिए।

शांत संत को पहचान पाना उनके आध्यात्मिक ऊंचाइयों को जानना अति कठिन है। मुनि श्री सुविज्ञ सागर जी इस अवसर पर मुनि श्री सुविज्ञ सागरजी महाराज ने कहां शांत संत को पहचान पाना उनके आध्यात्मिक ऊंचाइयों को जानना अति कठिन है। आचार्य श्री परम समताधारी, ज्ञान चेतना को धारण करने वाले हैं। उन्होंने माताजी सुवत्सलमति द्वारा रचित कविता “परम उच्चभावो वाले है कनक नंदी गुरुवर” अपने मधुर कंठ से सुनाई। वही निर्मला जैन मुंबई वालों ने अपना अनुभव बताया कि आचार्य श्री का चेहरा बच्चों जैसा भोला है अतः उनके अपार अथाह ज्ञान के बारे में मैं जान नहीं पाई। आचार्य श्री ख्याति, पूजा ,लाभ, प्रसिद्धि आदि से कोसों दूर हैं। आप बैठने के लिए सिहासन का भी प्रयोग नहीं करते। आपका ज्ञान जन-जन तक विश्व में पहुंचे ,आप सभी को आत्मा से परमात्मा बनाना चाहते हैं इसलिए अध्यात्मिक ज्ञान ही देते हैं तथा अंतरंग तप अधिक करते हैं।

पुनर्वास कॉलोनी के कमल कुमार गोदावत ने बताया कि 2007 में आचार्य श्री के साथ सुबह में भ्रमण में रोज जाते थे आचार्य श्री तब किस प्रकार आहार लेना चाहिए यह बताते थे पहले सीताफल नहीं खाते थे क्योंकि सर्दी हो जाती है।

आचार्य श्री ने बताया भोजन करने से पहले सीताफल, दूध, मिष्ठान आदि खाकर के फिर भोजन करना चाहिए। बेसन उड़द की दाल आदि का कम प्रयोग,इमली,मिर्च का नही प्रयोग करने से मेरा स्वास्थ्य आचार्य श्री के आशीर्वाद से अच्छा हैं।
विजय लक्ष्मी जैन से प्राप्त जानकारी

संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी

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