पूज्या प्रज्ञा पद्मनी पट्ट गणिनी आर्यिका 105 विज्ञमति माताजी के दीक्षा दिवस पर माला सोनी बडनगर की भाव भीनी विनयांजली
परम पूज्या गणिनी आर्यिका 105 विशुद्धमति माताजी की श्रेष्टम शिष्या आशु कवियत्री प्रज्ञा पद्मनी प्रातः स्मरणीय पट्ट गणिनी आर्यिका 105 विज्ञमति माताजी मेरी आराध्य मेरी गुरुमाँ जो अद्भुत अलोकिक असाधारण प्रतिभा की धनी है उनके चरणों मे शीश झुकाकर कर जोड़ कोटिश वंदन करती हु एवम आर्यिका विजित मति माताजी विशोर्य मति माताजी विकर्ष मति माताजी को वन्दामी उनके चरणों मे भाव भीने उदगार

सब कुछ नया सब कुछ अद्भुत सा केसी अनुभूति रही होगी। जब कोटा मे विजयादशमी पर दीक्षा महोत्सव हुआ

पाषाण मणी से मिल रहा
कितना मनोरम द्रश्य था
भक्ति श्रद्धा का समुन्दर,उमड़ता अद्रश्य था
नज़र भर देखा गुरु माँ ने
उमडते उत्साह को इक
नज़र भर,जाचा गुरु माँ ने
जोश समूह दीक्षार्थियो, के विश्व सारा झुक गया
देख अद्भुत शक्ति, उनकी पग तलो पर गिर गया
दीनबन्धु गुरु मा ने नज़र
इतिहास पर कुछ क्षण से देखी
सामने उनके खडे थे
षटखडागम के वे रेखी
मोन ही तब मोन से
मन की इबादत कह रहा
गुरु माँ जब आपके चरणों में होती हु मेरी यह कामना है कैलाश पर्वत से मानसरोवर तक कीर्ति का परचम फहरे हम ऐसी भावना को भाते है आप सब की समता हम सबको रत्नत्रय पर आरूढ़ करते हुये आपकोमोक्ष की सोगात मिले दीर्घायु होकर आशीर्वाद हम सब पर बरसता रहे पुण्य चरणों की किरणों व रज से हम अपनी किस्मत चमका ले
परम पूज्य विज्ञ मती माताजी के लिये
जिनकी अदभुत वाणी में चुंबक सा
आकर्षण है,जिनका धवल कुंद सा जीवन हम सबके लिए एक दर्पण है। अध्यात्म बाग के ये तो बडे अनोखे मालित है।
शत शत नमन
माला सोनी बड़नगर
