मुनि श्री विराट सागर जी महाराज की ग्रहस्थ अवस्था की बहन प्रियंका विनायका ने लिया विराट सागर महाराज का आशीर्वाद
खुरई
बहुत ही भावुक क्षण हुआ करते हैं जब भाई और बहन का मिलन होता हो लेकिन वही भाई जब संसार से विरक्ति को लेकर श्रमण बन जाता है मुनि बन जाता है तब वह एक साधु के रूप में होता है और ग्रहस्थ जीवन के संबंधों का लोप हो जाया करता है। ऐसे ही क्षण धर्म परायण नगरी खुरई नगर में देखने को मिले जब कल के

अमित आज के मुनि श्री विराट सागर महाराज की ग्रहस्थ अवस्था की बहन प्रियंका मनीष विनायका ने पूज्य मुनि श्री का मंगल आशीर्वाद लिया। वह बहन जो कभी अपने भाई की कलाई में राखी बांधा करती थी आज वह एक साधक के रूप में पूज्य मुनि श्री विराट सागर जी महाराज को नमन करते दिखाई पड़ती है।

यह केवल हम जैन दर्शन में ही देख सकते हैं । दुर्लभ क्षणों को हम संजोकर कर रखे। यह बहुत ही बिरले क्षण कहे जा सकते हैं।
अगर हम पुज्य मुनि श्री के संस्मरण पर ध्यान दें तो ज्ञात होता है की पूज्य मुनि श्री धर्म से विमुख थे लेकिन उनके जीवन पर प्रशांतमति माताजी के संघ का उनके नगर हाटपिपलिया में प्रवास रहा तब उनके जीवन में वैराग्य का प्रस्फुटन हुआ।उनकी बहन प्रियंका बताती हैं की। उसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और संसार मार्ग की की विरक्ति का भाव लिए गुरु चरणों की ओर बढ़ चले आज हम उन्हें विराट सागर महाराज के रूप में देख रहे हैं। ग्रहस्थ अवस्था में अपनी बहन को गुड़िया कहकर बुलाते थे। और उनकी हर बात को माना करते थे। इन क्षणों को हम देखते हैं तो यह क्षण सभी की आंखों को नम कर देते हैं। पूज्य मुनि विराट सागर जी महाराज पर अपनी ग्रहस्थ अवस्था की दादी का भी विशेष प्रभाव रहा।

पूज्य मुनि श्री के भजन जैसे गुरु के चरणों में जो आ गया उसका सुमंगल हो गया,व शिक्षाप्रद भजन औलाद के खातिर इंसा ने लोगो जीवन को और हृदय को झकझोर कर रख दिया है।और उनके जीवन में परिवर्तन हो गया। महा साधक के चरणों में मेरा कोटि-कोटि नमन
अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी
