ध्वनि की तरंगों में अपार शक्ति होती है संथान साग़र जी
बावनगजा
पूज्य मुनि श्री संथान साग़र जी महाराज ने भक्तामर व्याख्यान माला में उदबोधन देते हुए प्रभु भक्ति का महत्व बताया जो भी प्रभु की भक्ति को भावों से करता है उसके ऊपर कैसा भी बंधन होता है वह तोड़ गिरता है। उन्होंने भक्ति हेतु चार बातों का विशेष उल्लेख किया भक्ति करते हुए एकाग्रता, निष्ठा,आस्था, तन्मयता का विशेष महत्व बताया ।
ध्वनि की तरंगों में अपार शक्ति विधमान होती है
पुज्य मुनि श्री ने ध्वनि की तरंगों का विशेष महत्व बताया उन्होने कहा ध्वनि की तरंगों में अपार शक्ति विधमान होती है उन्होंने अल्ट्रासाउंड पद्धति को इसका आधार बताया। उन्होनें वैज्ञानिको का जिक्र करते हुए कहा की वे इस बात को कहते है की 18000 साईकल पार हो जाने पर ध्वनि अभेद हो जाती है।
उन्होने आगे कहा प्रभु की भक्ति से भीतरी और बाहरी बन्धन टूट जाते है मानतुंग स्वामी का जिक्र करते हुए कहा की उन्होने भय से मुक्त होने का मार्ग को बताकर हम सभी के सम्यक़दर्शन को पुष्ट किया है।
आस्था को बलवती बनाए।
आस्था को बलवती बनाने का जिक्र करते हुए मुनि श्री ने कहा की व्यक्ति की आस्था डांवाडोल हो जाती है। अपनी आस्था को बनाए रखने हेतु बड़े
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
