श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के समापन अवसर पर जिनालय से निकली भगवान जिनेन्द्र की शोभायात्रा*
भोपाल
आचार्य श्री विद्या सागर महाराज के शिष्य मुनिश्री विमल सागर महाराज, मुनिश्री अनंत सागर महाराज, मुनिश्री धर्म सागर महाराज और मुनिश्री भाव सागर महाराज के सानिध्य में 09 दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन विश्वशांति महायज्ञ के साथ हुआ।
प्रातः भगवान जिनेन्द्र का अभिषेक और मंत्रोच्चारित शांतिधारा के साथ अष्ट द्रव्यों से प्रभु के अनंत गुणों की आराधना की गई। दिगम्बर जैन पंचायत कमेटी ट्रस्ट के अध्यक्ष मनोज बांगा ने बताया कि विश्वशांति की कामना के साथ इन्द्र-इन्द्राणियों द्वारा आहुतियां दी गई।

विधानाचार्य नितिन भैया एवं अविनाश भैया के निर्देशन में मंत्रोच्चार के साथ धार्मिक अनुष्ठान हुए। विधान के प्रमुख पात्रों एवं पुण्यार्जक परिवारों का सम्मान मनोज बांगा, मनोज आर.एम., नरेन्द्र वंदना, पंकज सुपाड़ी द्वारा किया गया। जिनालय से धर्म ध्वजाओं के तले गाजे-बाजे के साथ भव्य शोभायात्रा निकली जिसमें भगवान जिनेन्द्र के रजतमयी रथ पर विराजमान भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा के समक्ष प्रमुख पात्र चवर ढुराकर भक्ति कर रहे थे। जय अरहंत देव की जय जिनेन्द्र देव की विश्व कल्याण अहिंसा से होगा जयकारों के साथ महिलाएं भक्ति नृत्य कर रहे थे। शोभायात्रा के समापन पर कलशाभिषेक हुये आशीषवचन में मुनिश्री विमल सागर महाराज ने कहा कि जीवन में ठहराव जरूरी है। जो अपने में ठहराव लाते है वही अंतिम पडाव मुक्ति पाते हैं।
अंशुल जैन प्रवक्ता से प्राप्त जानकारी के साथ
अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी
