हम जिस रंगमंच पर बैठे है वह हमारी जीवन शैली को आकर्षित करता है विज्ञमती माताजी
ग्वालियर
पूज्या गणिनी आर्यिका 105 विशुद्धमति माताजी के सानिध्य में चंपाबाग धर्मशाला में 15 दिवसीय अखण्ड णमोकार मंत्र अविरल गूंज का आयोजन हो रहा है, वही शुक्रवार की बेला में आदिनाथ महिलामंडल पनिहार की सदस्याओ ने अपनी सहभगिता दी व भक्तिमय होकर वाद्य यंत्रों के गूंज करते हुए पाठ किया।
पहले गुरु बनाओ विज्ञमती माताजी
इस अवसर पर सर्वप्रथम पट्ट गणिनी आर्यिका विज्ञमती माताजी ने कहा की अगर जन्म लिया उसके बाद भी जीवन को सार्थक नही बनाया तो जैसे आए हो वैसे ही चले जाओगे।
उन्होंने रावण का उदाहरण दिया कहा उसके पास समस्त शक्तियां विधमान थी लेकिन पास में गुरु नही था, गुरु के बिना जीवन व्यर्थ रहता है। वे गुरु ही होते है जो हमको अंधकार से उजाला दिखाते है। आत्मा का घर भीतर चेहरा एक सा ही होता है। लेकिन उस पर झलकने वाले भाव अलग अलग हुआ करते है।हम जिस रंगमंच पर बैठे है, वह हमारी जीवन शैली को आकर्षित करता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी
