ललितपुर । वैज्ञानिक सन्त आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज ने कहा कि ज्ञान वापी प्रकरण में आए फैसले का मैं हार्दिक स्वागत करता हूं और निर्णायकों को धन्यवाद ज्ञापित करता हूं। उन्होंने जो दूध का दूध और पानी का पानी किया है, वह भारतीय न्यायालय को परमात्मा का मंदिर सिद्ध करता है। यह निश्चित है कि सनातन काल से इस भारत भूमि पर श्रमण और वैदिक संस्कृति रही है। उसी के अनुसार मंदिर बनते रहे हैं। इस्लाम तो अभी एक हजार वर्ष पूर्व से भारत में आया है। अतः आगे भी उचित निर्णय की अपेक्षा रखता हूं।
