महरौनी। श्री कुन्दकुन्द दिगंबर जैन स्वाध्याय मन्दिर ट्रस्ट, महरौनी के अंतर्गत निर्माणाधीन श्री दिगंबर जैन पंच बालयति स्वाध्याय मंदिर में पहली बार पर्वाधिराज दशलक्षण पर्व का आयोजन किया गया। जिसमें प्रतिदिन सुबह जिनेन्द्र देव का अभिषेक, पूजन, दशलक्षण महामंडल विधान एवं राजस्थान से पधारे पं. श्री नागेश जी पिडावा के श्री मोक्षमार्ग प्रकाशक जी एवं श्री रत्नकरण्ड श्रावकचार जी पर स्वाध्याय हुआ। दीवानगंज, भोपाल से पधारे पं. विनीत जी शास्त्री द्वारा दशलक्षण मंडल विधान एवं सांस्कृतिक धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन उल्लास पूर्वक भक्ति भाव से किया गया।
दशलक्षण पर्व की आखिरी दिन पंडित नागेश जैन पिडावा ने बताया कि यह दशलक्षण पर्व मनाना तभी सार्थक है, जब ये लक्षण हमारे आचरण में भी आएं। केवल बाह्य संयम ही ब्रह्मचर्य नहीं है बल्कि आत्मा के समीप रहना एवं आत्मा में रमणता, स्थिरता का नाम ब्रह्मचर्य है। हम सभी धर्म की इन 10 लक्षणों के माध्यम से इस दुर्लभ मनुष्य जीवन को सार्थक करें। देव, शास्त्र, गुरु की सम्मान पूर्वक आराधना करें और अपना जीवन पूर्ण नहीं बल्कि सफल और सार्थक बनाएं। प्रतिदिन हुए दशलक्षण मंडल विधान के छंदों का भी उन्होंने बहुत भावपूर्ण अर्थ समझा कर विधान की रहस्य को भी बताया। रात्रिकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रम में कुमारी आद्या जैन के मंगलाचरण के बाद कुमारी नित्या जैन द्वारा आत्मा की 47 शक्तियों का प्रदर्शन किया गया एवं कुमारी मैत्री जैन एवं जान्या जैन द्वारा पिता-पुत्र वैराग्यमय संवाद की प्रस्तूति की गई। कु मैत्री, कु आद्या, कु पाखी, कु नित्या और कु जान्या द्वारा चार कषायों पर भी आकर्षक प्रस्तुति दी गयी। इसके बाद भव्य इंद्रसभा एवं पंचकल्याणक नाटिका का आयोजन पंडित नागेश जैन पिडावा एवं विनीत जैन शास्त्री दीवानगंज के निर्देशन में किया गया। इसमें बताया गया कि जब तीर्थंकर भगवान माता के गर्भ में आते हैं तो 6 माह पहले से ही कबेर द्वारा रत्नों की बरसात होने लगती है। तब सौधर्म की सभा में इन्द्राणियां अपने इन्द्रों से तत्व चर्चा करती हैं और गर्भ में आए तीर्थंकर भगवान के बारे में जानना चाहती हैं। इस अवसर पर भव्य इन्द्रसभा आयोजन किया गया। सौधर्म इन्द्र और शचि इन्द्राणी के रूप में निखलेश-संगीता सिंघई, कुबेर इंद्र इन्द्रानी के रूप में धन्यकुमार पवैया-नीलम पवैया रहे जबकि इन्द्र-इन्द्राणी के रूप में शील चंद्र गुढ़ा, ज्ञानचंद्र जैन गुढ़ा, प्रकाश शास्त्री-मंजू जैन गुढ़ा, रवीन्द्र-किरण जैन गुंदरापुर, महेंद्र-मीना जैन पठा, विनोद जैन-कल्पना जैन पठा, कपूरचंद भायजी-मुन्नी देवी, कैलाश चंद चौधरी-सरोज जैन, विनय-प्रीति सिंघई, रीतेश-मिली जैन गुन्दरापुर, प्रिंस सिंघई, आशीष चौधरी-शालिनी जैन आदि ने भाग लिया।
इसी क्रम में पंचकल्याणक नाटिका में प्रोजेक्टर के माध्यम से माता के सोलह स्वप्न दिखाये गये। तत्पश्चाप अष्ट कुमारियो द्वारा माता की सेवा की गयी। माता एवं अष्ट कुमारियों के बीच रोचक संवाद हुआ। माता-पिता का पात्र सरोज जैन एवं कैलाश चंद्र चौधरी ने निभाया जबकि अष्ट कुमारियों के रूप में कु. मैत्री, कु. आद्या, कु. नित्या, कु. जान्या आदि रहीं। कार्यक्रम में कपूर भायजी, राजकुमार सिंघई, सुरेश कुमार मेंगुआ, अखिलेश चौधरी, प्रकाश शास्त्री गुढ़ा, अनूप भायजी, अमित भायजी, आदेश पवैया, आशीष चौधरी, निखलेश सिंघई, विनय सिंघई, रीतेश गुन्दरापुर, गोलू मेंगुवा आदि का सहयोग रहा। संचालन संयुक्त रूप से कैलाश चंद्र चौधरी एवं धन्य कुमार पवैया द्वारा किया गया।
