गोलाकोट (मध्यप्रदेश)। मध्यप्रदेश के खनियांधाना से महज 8 किमी सड़क मार्ग व एक किमी की पहाड़ी चढ़ाई पर स्थित पाषाण निर्मित गोलाकोट जिनालय में विश्व की सर्व प्राचीन भगवान आदिनाथ की प्रतिमाएं विराजमान हैं। पुरातत्वविदों व इतिहासकारों का दावा है कि ये प्रतिमाएं करीब 3 हजार साल पुरानी हैं। गोलाकोट अन्य जैन तीर्थों से इसलिए भिन्न है, क्योंकि यहां भगवान आदिनाथ पदमासन में विराजमान हैं, उनके दोनों ओर खड़गासन में पार्श्वनाथ की प्रतिमा है। यह तीर्थ क्षेत्र जिन पहाड़ियों पर स्थित है, उसे चारों ओर से गोलाई के रूप में पर्वतों की एक श्रृंखला घेरे हुए है, इसलिए इसे गोलाकोट नाम मिला।ललितपुर में मुनि श्री सुधासागर जी महाराज के सानिध्य में चल रहे संस्कार शिविर में धर्म लाभ ले रहे देश-विदेश से आए तीन हजार से अधिक शिवरार्थियों ने गोलाकोट अतिशय तीर्थ जाकर अतिशयकारी भगवान आदिनाथ और प्राचीन जिन प्रतिमाओ के दर्शन किये। तीर्थ कमेटी द्वारा वहां भव्य महाआरती का आयोजन किया, जिसमें हजारों दीपो के साथ शिवरार्थियो ने मंगल आरती की। यह तीर्थ क्षेत्र मुनि श्री सुधासागर जी के दिशा-निर्देशन में विकसित हो रहा है। देश के मुख्य तीर्थों में आज इसका नाम है। यहां यात्रियों को ठहरने और भोजन आदि की उत्तम व्यवस्था है।
