संयम के पालन से जीवन मंगलमय होगाः वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

JAIN SANT NEWS श्री महावीर जी

महावीर जी। पंचेन्द्रिय के विषय, सार रहित हैं, भय उत्पन्न करने वाले हैं, संसार भ्रमण में दुख देने वाले हैं, संसार में सुख नहीं मिलता, इंद्रिय नाशवान हैं, निम्न स्थान को प्राप्त कराने वाले हैं, इन्द्रिय विषय के भोग से सेवन से। आर्त् ध्यान उत्पन्न होता है। यह पंचेन्द्रिय विषय नरक निगोद में ले जाते हैं। जो अज्ञानी जीव हैं वह इंद्रिय विषयों के दोषों के प्रति सोचते नहीं हैं। यह मंगल देशना पर्युषण पर्व के उत्तम संयम धर्म पर वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने महावीर जी धर्म सभा में प्रगट किए।वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री ने आगे कहा कि आज के दिन सुगंध दशमी व्रत भी है। पर्व कहें या महापर्व कहें 5 दिन एक 1 दिन करते हुए आगे बढ़ते जा रहे हैं। यह दिन समाप्त होने वाले हैं. आप लोग संस्कार शिविर में आए हैं, आपके घर की वापसी होगी किंतु वास्तविक घर आपका भौतिक घर नहीं होकर सिद्धालय घर है। इस ओर बढ़ने की भावना होना चाहिए। संयम इसका माध्यम है। संयम के माध्यम से अणुव्रती महाव्रती बनकर असली घर की प्राप्ति कर सकते हैं। आज असंयम, मिथ्यात्व, अज्ञान के कारण आप वास्तविक घर सिद्धालय को भूल गए हैं। महापर्व के दौरान तत्वार्थ सूत्र के विवेचन में अपने धर्म को समझने का प्रयास किया है। रत्नत्रय रूपी सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चारित्र, संयम की राह पर बढ़ने का माध्यम है। संयम से हम सिद्धालय रूपी घर को प्राप्त कर सकते हैं। आपने अनंत भव में भ्रमण करते हुए अनेक पर्याय में सब कुछ देखा है, किंतु स्वयं को आत्मा को नहीं देखा है। आपने पांचों इंद्रियों के वशीभूत होकर सभी विषय भोगों का उपभोग किया है किंतु संसार भ्रमण में वास्तविक पर्याय को प्राप्त करने के लिए पुरुषार्थ नहीं किया है। वह प्रयास नहीं किए जिससे संसार भ्रमण से हमें मुक्ति मिल सके।

इंद्रिय विषयों के बारे में विचार नहीं करते मूर्ख प्राणीआचार्य श्री ने आगे बताया कि मूर्ख प्राणी इंद्रिय विषयों के बारे में विचार नहीं करते हैं। इस कारण वह निंदा को प्राप्त करते हैं। इससे उन्हें प्रशंसा नहीं मिलती है। इंद्रिय विषयों के सेवन से मोहवश प्राणी संसार में भ्रमण कर रहा है। जिस प्रकार नदी के दो किनारे होते हैं, उसी प्रकार प्राणी संयम और इंद्रिय संयम नदी के दो तट हैं। इनके माध्यम से संयम को धारण कर आप वास्तविक सुख को प्राप्त कर सकते हैं। आचार्य श्री ने करुणामय प्रवचन में कहा कि जिस प्रकार आप तीन मंजिला, 11 मंजिला भवनों में फ्लैटों में पानी ऊपर चढ़ाने के लिए विद्युत मोटर का उपयोग करते हैं उसी प्रकार आत्मा रूपी पानी को संयम रूपी 3 एचपी के मोटर पंप से संयम तप का पालन करते हुए 14 राजुल ऊपर सिद्धालय को प्राप्त कर सकते हैं।शक्ति धर्म से आती है। इंद्रिय विषयों के सेवन से शक्ति नष्ट होती है। संयम के पालन से जीवन में मंगल जीवन मंगलमय होगा।

गजु भैया दीप्ति पूनम दीदी ने बताया कि पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी के 73वें वर्ष वर्द्धन अवतरण वर्ष के उपलक्ष्य में सोने का छत्र भूगर्भ से प्रगटित चमत्कारी 1008 श्री महावीर स्वामी पर आचार्य श्री एवं संघस्थ साधुओं के सान्निध्य में 7 प्रतिमा धारी संघस्थ साधना दीदी, पूर्वा, समर तथा स्पर्श कंठाली इंदौर द्वारा अर्पित किया गया। इस अवसर पर परिजन राजेश, अजय, पूनम, दीप्ति, निर्मला दीदी उपस्थित थीं।

श्री जी का महिला पुरुषों द्वारा पंचामृत अभिषेकआचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व श्री जी का महिला पुरुषों द्वारा पंचामृत अभिषेक किया गया। आज के इंद्र बनने तथा शांति धारा का सौभाग्य श्रीमती चंपा देवी जमनालाल जी,बोहरा भींडर परिवार को प्राप्त हुआ।श्री पवन कुमार, संतोष देवी सेठी परिवार गया बिहार को आचार्य श्री के पंचामृत से चरण प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट करने का पुण्यार्जक बनने का अवसर मिला। दशलक्षण पर्व की पूजन पश्चात दोपहर को तत्वार्थ सूत्र की विवेचना के पूर्व आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी के प्रवचन हुए।राजेश पंचोलिया इंदौर ने बताया कि दोपहर को आचार्य श्री संघ सहित सुगंघ दशमी का जलूस नगर के सभी मंदिरों में गया।

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