ललितपुर। वर्णीनगर मड़ावरा में दशलक्षण महापर्व के पांचवें दिन उत्तम सत्य धर्म के अवसर पर नगर में चातुर्मासरत आचार्य श्रेष्ठ 108 विद्यासागर महाराज के परम प्रभावक शिष्य अष्टम् निर्यापक मुनिश्री अभय सागर, मुनिश्री प्रभात सागर, मुनिश्री निरीह सागर महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य में श्री महावीर विद्या विहार के परिसर में प्रात:काल श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा,पूजन व धार्मिक क्रियायें सम्पन्न हुईं। श्रीजी की शांतिधारा करने का सौभाग्य अशोक कुमार,राकेश कुमार,इंजी. सत्येंद्र जैन (लंदन),जैनिल जैन, शिक्षक चक्रेश जैन सीरोंन परिवार,सिंघई शांति कुमार,राहुल सेठी परिवार,अभिषेक जैन के परिवार को प्राप्त हुआ। धर्मसभा के पूर्व आचार्य श्रेष्ठ 108 विद्यासागर महाराज के चित्र का अनावरण व दीप प्रज्जवलन व मुनि ससंघ को शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य पुण्यार्जक परिवारों ने प्राप्त किया।
इस दौरान धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री निरीह सागर महाराज ने कहा कि व्यक्ति को कभी भी अप्रिय वचन नहीं बोलना चाहिए और दूसरों की निंदा भी नहीं करनी चाहिए। हमेशा सत्य वचन ही बोलना चाहिए, हमें दूसरों के साथ विश्वासघात नहीं करना चाहिए। मौन और सत्य जीवन का आधार है। उन्होंने दशलक्षण पूजन की इन पंक्तियों के माध्यम से बताया कि ‘कठिन वचन मत बोल,पर निंदा अरू झूठ तज सांच जवाहर खोल, सतवादी जग में सुखी।’ सत्य बोलने वाला हमेशा सुखी रहता है। प्रवचन के उपरांत तत्वार्थ सूत्र का वाचन हर्षित जैन, पर्युल जैन,मयंक जैन,काव्या जैन ने किया। दोपहर में निर्यापक श्रमण मुनिश्री अभय सागर महाराज ने तत्वार्थ सूत्र की अर्थ सहित व्याख्या की। भक्तिपूर्वक अर्घ समर्पित करने का सौभाग्य विद्या आदर्श बालिका मंडल ने प्राप्त किया। चातुर्मास समिति के महामंत्री डा. राकेश जैन सिंघई ने जानकारी देते हुए बताया कि सायंकालीन आचार्य भक्ति में अखिल भारतवर्षीय स्वस्ति महिला मंडल द्वारा नाटिका का मंचन किया गया। रात्रि में पं. संभव जैन ने दशलक्षण धर्म पर मार्मिक प्रवचन दिए। रात्रि में विशेष प्रश्न मंच-“कौन बनेगा शिरोमणि ” आचार्य विद्यासागर संस्कार वर्णी पाठशाला मडावरा की प्राचार्या ममता जैन के निर्देशन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का संचालन चातुर्मास समिति के मंत्री राजेश सौंरया, धर्मेंद्र सराफ ने किया।
