ललितपुर। वर्णीनगर मडा़वरा में दशलक्षण महापर्व के चतुर्थ दिवस उत्तम शौच धर्म के अवसर पर नगर में चातुर्मासरत आचार्य श्रेष्ठ 108 विद्यासागर महाराज के परम प्रभावक शिष्य अष्टम् निर्यापक मुनिश्री अभय सागर,मुनिश्री प्रभात सागर, मुनिश्री निरीह सागर महाराज ससंघ के पावन सानिध्य में श्री महावीर विद्या विहार के परिसर में प्रात:काल श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा, पूजन, दशलक्षण विधान एवं दोपहर में तत्वार्थसूत्र का वाचन कर पुण्यार्जक परिवार ने अर्घ्य समर्पित किए। सायंकाल को संगीतमय आरती आदि धार्मिक क्रियायें व रात्रि में प्रवचन का लाभ श्रावकों को मिल रहा है। शांतिधारा करने का सौभाग्य गोपीलाल, दीपेश कुमार, रोहित कुमार जैन डोंगरा परिवार, कोमल चंद्र, अरविंद कुमार जैन गौना परिवार एवं श्रावक श्रेष्ठी बनने का सौभाग्य सवाई सिंघई श्रेयांश कुमार जैन, सिंघई अभिषेक जैन को प्राप्त हुआ। मुनिश्री ससंघ को शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य निर्मल कुमार, दीपक जैन दुकान वाले, प्रवक्ता रमेश चंद्र जैन, डॉ. अभिषेक जैन, वैदिक जैन, प्रमोद कुमार, विकास जैन धवा वाले परिवार को प्राप्त हुआ। इस दौरान धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री प्रभात सागर महाराज ने कहा कि हमें संतोष धारण करना चाहिए। व्यक्ति को तपस्या यथाशक्ति करनी चाहिए। संतोषी व्यक्ति ही सुख को प्राप्त करता है। लोभ पर विजय प्राप्त करना ही उत्तम शौच धर्म है। मन की स्वच्छता के लिए जरूरी उत्तम शौच धर्म ही माना गया है। उत्तम शौच धर्म हमें पवित्रता सिखाता है। शौच का अर्थ पवित्रता है। शौच धर्म शुद्ध भावों को कहते हैं। अपवित्रता से पवित्रता की ओर आने की प्रक्रिया ही शौच धर्म है, जिसकी प्राप्ति बहुत ही कठिन है। उत्तम शौच हमें हमारे शरीर में निहित अशुद्धि क्रोध, मान, माया, लोभ का निस्तारण कर पवित्रता प्राप्त करे, अतः हमारे ह्रदय में मद क्रोधादिक बढाने वाली जितनी भी दुर्भावनाएं हैं, इनमें सबसे प्रबल लोभ कषाय है। इस लोभ कषाय पर विजय पाना ही उत्तम शौच है। संतोष धारण करने का दिन ही शौच धर्म है। हमें वर्तमान समय में इसकी महती आवश्यकता है। कहा भी गया है -लोभ पाप का बाप बखाना। लोभ का त्याग कर हम अपने जीवन में शौच धर्म को अपनाएं, तभी शौच धर्म मनाना सार्थक होगा। चातुर्मास समिति के महामंत्री डॉ. राकेश जैन सिंघई ने जानकारी देते हुए बताया कि रात्रि में हथकरघा पर आधारित नाटिका की प्रस्तुति आचार्य विद्यासागर संस्कार संस्कार वर्णी पाठशाला की छात्रा कु. श्रद्धा जैन ने प्रस्तुत की। मोक्ष शास्त्र का वाचन संस्कृति सराफ, नैनी जैन, सुष्मिता जैन, अपूर्वा जैन ने किया। वृद्धाश्रम पर आधारित नाटिका संस्कृति सराफ ने प्रस्तुत की।
