दस धर्मों को अंगीकार करने वाला बन सकता है परमात्मा -आर्यिकाश्री संस्कारमति

JAIN SANT NEWS शाहगढ़

जैनियों का महाकुंभ आज से शुरू
-जिनालयों में सुबह से देर रात दस दिनों तक रहेगा धार्मिक वातावरण

शाहगढ़। जैनियों का दस दिवसीय पर्व बुधवार से शुरू हो गया है। नगर के पंचायती जिनालय समेत सभी जिनालयों में धार्मिक कार्यक्रम सुबह से देर रात तक चलते रहेंगे। नगर में विराजमान आर्यिका 105 चिंतनमति माताजी सत्संग के मंगल सानिध्य में संस्कार शिविर बड़ा मंदिर परिसर में शुरू हुआ। शिविर में 50 से अधिक शिविरार्थियों को दस धर्मों के मर्म को बताकर कल्याण के मार्ग को कैसे प्रशस्त कर सकते हैं, विषय पर संस्कारित किया जायेगा। आर्यिकाश्री 105 संस्कारमति माताजी ने कहा कि हमारी आत्मा में परमात्मा है परंतु मनुष्य शान्ति, सुख की खोज में इधर-उधर भटक रहा है। कभी अपने अंदर झांक कर नहीं देखा। हम अपने मालिक स्वयं हैं, कोई हमारा मालिक नहीं है। परमानंद स्त्रोत में कहा गया है कि जैसे पोषण में सोना होता है, दूध के अंदर घी और तिल के अंदर तेल होता है, वैसे ही आत्मा के अंदर परमात्मा होता है, जंगल में पत्थरों को आपस में रगड़ने पर अग्नि उत्पन्न होती है, आग लग जाती है, उसी प्रकार से हमारी आत्मा के अंदर परमात्मा बनने की शक्ति विद्यमान है, जहां हमारी भारतीय संस्कृति में गुणों को सर्वोच्च स्थान दिया जाता है, वहीं रवि का प्रकाश नहीं, दीया प्रकाशित होता है। यदि हमें बालक से भी गुण मिलते हैं तो उन्हें स्वीकार करना चाहिए, उत्तम दस धर्मों को अंगीकार करें तो परमात्मा बन सकते हैं।

इस दौरान आर्यिकाश्री ने अकबर-बीरबल का एक दृष्टांत सुनाया, जिसमें बीरबल से अकबर द्वारा पूछे गए प्रश्नों उत्तर देने में चिंतित बीरबल को देखकर छोटे बालक ने राजा को जवाब देकर राजा को खुश कर दिया था। इसलिए छोटों से भी अगर ज्ञान की दो बातें मिलें तो उन्हें ग्रहण कर लेना चाहिए।पाठशाला के बच्चों की एक माह की तैयारी पूरी

दसलक्षण पर्व के दौरान पारसनाथ दिगंबर जैन बंशीधर पाठशाला के छोटे-छोटे बच्चों द्वारा रात्रि में दी जाने वाली शिक्षाप्रद सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की एक माह चल रही तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। विद्यासागर आरती संघ के सदस्य प्रभात मनू ने बताया कि बड़ा मंदिर परिसर में प्रतिदिन रात्रि 8 बजे से होने वाले कार्यक्रमों की श्रृंखला में वंशीधर पाठशाला के अध्ययनरत बच्चों द्वारा 2 सितंबर को स्वार्थ का संसार नाटिका, 3 सितंबर को नारी का अलंकरण मनोरमा सती, 4 सितंबर को कुंडलपुर की गौरव गाथा, 5 सितंबर को मां का दिल नाटक , 6 सितंबर को पाठशाला के संस्कार जैसी संदेशात्मक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी जाएगी।

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